Life Without Water Poem in Hindi बिना पानी के जीवन
नमस्ते दोस्तों स्वागत है आपका हमारे ब्लॉग में इस पोस्ट में आपको Life Without Water Poem in Hindi बिना पानी के जीवन कविता लिखी हुई है। जिन्हे आप पढ़ सकते है, जो जल के महत्त्व को बताया हुआ है। जिसका जल के बिना जीवन पर इसका असर होता है। हमारा जल से ही जीवन का आरम्भ हुआ है। जल ही जीवन का आधार है। मनुष्य के शरीर का 70% भाग जल पर ही निर्भर है। पानी पीने के अलावा, कई उदेश्यों के लिए जीवन में जल का उपयोग किया जाता है। दुनिया में सभी जीवो के लिए जल की आवश्यकता होती है। इसलिए, हम देखते है की न केवल इंसानों को बल्कि पोधो और जानवरों को भी पानी की आवश्यकता होती है। जल के बिना हमारी धरती नहीं रहेगी। हमें इस तथ्य को महसूस करने की जरुरत है। पानी के अनावश्यक उपयोग को एक बार में रोक दिया जाना चाहिये। हर एक व्यक्ति को पानी के संरक्षण और संतुलन को बहाल करने के लिए हम सभी को काम करना चाहिये। यदि नहीं, तो हम सभी जानते है की इसके परिणाम क्या हो सकते है जो इस कविता के माध्यम से आप को बताया है। अगर आपको हमारा पोस्ट पसंद आए तो अपने दोस्तों और परिवार में जरूर शेयर करे। वो भी हमारे ब्लॉग में लिखी हुई पोस्टो का आनंद ले सके। साथ ही हमारे ब्लॉग पर बहुत ही जानकारिया मोजूद है। जो आपके काम आयगी, और तो और हमारे पोस्ट में आपको यहा जानकारियों के साथ इमेजेज और फोटोज भी मिलेंगी जो पोस्ट से सम्बंधित आप पढ़ रहे व देख रहे है। Life Without Water Poem in Hindi बिना पानी के जीवन कविता लिखी हुई पढ़ रहे है जिन्हे आप फेसबुक, व्हाट्सप्प, इंस्टाग्राम आदि पर शेयर कर सकते है। धन्यवाद।
धरती पर एक बूंद नहीं पड़ रही हैं
शहरों में पीने के पानी का संकट
गाँवों में किसानों की सांसे चढ़ रही हैं.....

लोगों के देवों पर भरोसे टूट रहे हैं।
आज सूखा कल अकाल की आशंका
लोगों के दिन-दिन धीरज छूट रहे हैं
नदी नाले झील तालाब सब खाली
सूखे कुओं पर आंखें गढ़ रही हैं....
प्रकृति मानव को कर्मों का दंड दे रही है
पर्यावरण उजाड़ ने का जवाब ले रही हैं
विज्ञान अब तक पैदा कर पाया नहीं पानी
कहां से लाओगे पानी पूछ सबसे रही है
मानव ने नहीं छोडे लोभ स्वार्थ तो
प्रकृति भी अब अपनी हठ पर अड़ रही हैं....
हे प्रभु सब दोष पाप हमारे क्षमा करो
बस बरसा दो धरती पर इतना जल
अगले आषाढ़ तक प्यास बुझे सबकी
खेतों में उजड़े नहीं किसान की फसल
हे दयालू है करूणाकर कृपा करो इतनी
बिन पानी प्राणियों की साँसें उखड़ रही है...

